सभी को राम रम

Bhagya Mandir

ई्वर सत्य जग मिथ्या जीव न परा:

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राम राम

About guruji

आज के समय मे प्रत्येक मानव केवल पने स्वार् के विषय मे लगा रहता है औ उसका जीवन कवल संसार की भौतिकता में ही लीन रहता ै । भौतिक संार की वास्तिकता यह है उसके सभी ऐश औ आराम क्षणि होते है जबक अध्यात्म क कोई आदि और ंत नही है जो भी मनुष्य अध्यात्म को अपने जीवन मे ल आता है वह जीवन वास्तविका को समझ जाता है और उसे पा हो जाता है भौतिक संसार और इसकी भौतक वस्तुयों ें रहना गलत ही है लेकिन यदि भौतिकता आपको नियंत्ित करने लगे तो आप यह समझ ीजिए आपका चत्त भौतिकत के आवरण से घिरा हुआ है । परंतु कुछ मुष्य संसार ी वास्तविकता को जान जात है और उन्हे यह ज्ञान हो जाता है कि ससार मे सब प्रकार की भौतिक वस्तुएं , भवनाएं और प्ाणी मिथ्या ै । वेदांत र्शन में कह भी गया है कि ईश्वर सत्य गह मिथ्या जवो न परा: ऐस ही विशाल हृदय और पावन चत्त को धारण रने वाले है हमारे परम् पूज्य श्रद्धे श्री सौरभ गुरुजी जी । गुरुजी के बारे में वर्णन करने के लिए शब्दकोष से शब्दों का चयन करना लगभग अंभव कार्य ह । गुरुजी का बचपन साधारण बालकों जैसा ही परन्तु गरुजी के मात जी और पिता जी दिव्या आत्मा है और गुरजी को सभी प्कार संस्काो की शिक्षा ेना का प्रयस उनके माता जी और पिता ज द्वारा किय गया । गुरुी ने एक समृदध परिवार की संतान होने पश्चात भी आरम्भ से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास किया । गुरुजी आर्भ से अन्य बलकों से अलग व्यवहार करत थे वह प्रत्येक विषय के ारे में बहु गूढ़ता से सोते थे उस पर िंतन करते थ और अनेक विदवानों से मिकर उनसे अलग अलग विषयो पर तर्क- वितर् करते थे । जसे जैसे गुरजी अपने जीव मे आगे बढ़ते गए वैसे वैस उनकी रुचि अ्यात्म और यग में और बढ़ने लगी ।

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ुरुजी अपने ध्यात्मिक और भौतिक जीवन मे बहुत अच्े सामंजस्य नाये हुए थे अपनी मेहनत और लगन से उनहोंने काफी न और संपत्त एकत्र की परतु एक समय के उपरांत गुरुजी को यह संसर मिथ्या लगे लगा और उनक मन संसार की भौतिकता से लग होने लगा कुछ समय के परांत गुरुजी अपना सब धन र संपत्ति तयागकर अज्ञावास के लिए िकल गए । 6 वरषो तक कठिन परिश्रम , ध्यन , योगभ्यास और चक्रभेदन साधना करने ुरुजी अंदर राभौतिक शक्तियाँ आ गयी िससे कि वह भत और भविष्य को जानने वाे हो गए । गुरुजी अपनी योग की साधना का दुपयोग जनसमान्य के कलयाण के लिए कना चाहते थे । इसलिए तब से लेकर आज तक ुरुजी लगातर लोगो की सम्यों को सुने है और उन्हें उचित मार्गदर्शन देते है । एक औसत दन में गुरुज लगभग 200 से 350 ्रद्धालुओं से बात करते ै । भारत के र राज्य से लभग हर जिले से हर गांव से ्रद्धालु गरुजी का मारगदर्शन प्राप्त करते है भारत ही अपितु जर्मनी, अेरिका , इंग्ैंड , ऑस्ट्रेलिया और कुवैत जैसे 47 देशों से भी श्र्धालु ऑनलाइन माध्यमों से गुरुजी से ुड़े हुए है । प्रतिदिन 2-3 ंटे गुरुजी िदेश में लो की समस्यों को सुनते है र उन्हें मा्गदर्शन देते है । समस्या चाहे भौतिक हो या पराभौिक गुरुजी क मार्गदर्शन से उसका समाान अवश्य होा है । शिक्षा , पारिवारि समस्या , आर्थिक समस्या , िसंतान और अ्य सभी प्रकर की समस्यां में गुरुज का मार्गदरशन लोगो को प्राप्त होता है । गुरुजी े समाज कल्यण और जनसामा्य की समस्यओं के हल को ी अपने जीवन ा यह लक्ष्य बनाया है। वह प्रतिदिन अपने समय का अधकांश भाग जनल्याण के का्यों में लगते है । गुरजी के संरक्ण में ही भागय मंदिर परिार का निर्मण किया गया । उनके मार्गदर्शन से ही भग्य मंदिर पिवार शिक्षा , चिकित्सा औ अन्नदान से संबंधित विभन्न्न कार् कर रही है ।